7th Pay Commission: अंतरिम बजट का असर, आंगनबाड़ी कर्मचारियों की तनख्वाह में होगा 50 फीसदी इजाफा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आखिरी कार्यकाल का बजट शुक्रवार (एक फरवरी, 2019) को पेश हुआ। अंतरिम बजट में पांच लाख रुपए तक की आय पर कर माफ कर दिया गया, जबकि इनकम टैक्स स्लैब में तो कोई फेरबदल नहीं किया गया। कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल के इस अंतरिम बजट में आंगनबाड़ी/सहायिका/आशा बहु आदि की तनख्वाह 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया। इंडियन पब्लिक सर्विस एंप्लाइज फेडरेशन ने गोयल के इस फैसले का स्वागत किया।


मीडिया रिपोर्ट्स में संगठन के अध्यक्ष के हवाले से कहा गया, 'एन पी एस के बारे में भारत सरकार ने कहा है कि सरकार का अंशदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 किया गया है। पर सरकार को पुरानी पेंशन लागू करनी चाहिए थी।' उन्होंने पीएम मोदी और वित्त मंत्री से मांग की कि आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मचारियों का विनियमितीकरण व न्यूनतम वेतन देने के साथ स्थाई नीति बनाने पर भी जल्द फैसला लिया जाए। उनके मुताबिक, अगर ऐसा न हुआ, तो कर्मचारी खफा रहेंगे।

सातवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़ा कोई भी ऐलान नहीं हुआ। कार्यवाहक वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान सातवें वेतन आयोग शब्द का जिक्र जरूर किया, पर उन्होंने इस संबंध में कोई नई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा था, "हमारी सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में फुर्ती दिखाई।"


इस फैसले से दी थोड़ी राहतः बजट पेश करते हुए गोयल ने कहा था- नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 के बजाय अब से 14 फीसदी होगा, जबकि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से एनपीएस के लिए लिया जाने वाला हिस्सा 10 फीसदी ही रहेगा। कार्यवाहक वित्त मंत्री के मुताबिक, कर्मचारियों और मजदूरों को नई पेँशन योजना में एनपीएस के लिए केंद्र चार फीसदी अधिक रकम का योगदान देगा

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